➤ हरनोड़ा पुल के दोनों सिरे जुड़े, मंडी और बिलासपुर के बीच सीधी कनेक्टिविटी का रास्ता साफ
➤ 18 करोड़ की लागत से बने 156 मीटर पुल से रामपुर-किन्नौर जाने वालों को मिलेगा वैकल्पिक मार्ग
➤ 14 साल की कानूनी लड़ाई के बाद निर्माण ने पकड़ी रफ्तार, नवंबर तक लोकार्पण का लक्ष्य
हिमाचल प्रदेश में मंडी और बिलासपुर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली अहम परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। सुंदरनगर के सलापड़-तत्तापानी मार्ग पर सतलुज नदी के ऊपर निर्माणाधीन हरनोड़ा पुल के दोनों सिरे नौ सितंबर को आपस में जुड़ गए हैं। करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे 156 मीटर लंबे पुल के दोनों हिस्सों के जुड़ने के बाद अब इसके बाकी निर्माण कार्य को तेजी से पूरा किया जा रहा है।
पुल के तैयार होने के बाद सुंदरनगर का सलापड़-तत्तापानी मार्ग सीधे बिलासपुर से जुड़ जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा मंडी और बिलासपुर के बीच आने-जाने वाले लोगों को मिलेगा। इसके साथ ही रामपुर और किन्नौर की ओर जाने वाले यात्रियों को शिमला-सोलन होकर लंबा चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध होगा।
लोक निर्माण विभाग ने पुल का निर्माण पूरा कर इसे अक्तूबर-नवंबर तक आम जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है। विभाग का लक्ष्य नवंबर तक इसका लोकार्पण करवाने का है।
पुल बनने से कई गांवों की कनेक्टिविटी होगी बेहतर
हरनोड़ा पुल के निर्माण से सुंदरनगर क्षेत्र के कई गांवों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। इनमें धवाल, रोपा, पठाना, सनीहन, बटवाड़ा, ऐहन, क्यान, जरड़, खुराल, धारली, सेरी, सलापड़, कंडार, सनवाली, नेरी और सोल समेत कई गांव शामिल हैं।
फिलहाल इन क्षेत्रों के लोगों को बिलासपुर और आसपास के इलाकों तक पहुंचने के लिए अपेक्षाकृत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। पुल के शुरू होने के बाद इन गांवों की आवाजाही और संपर्क व्यवस्था में सुधार होगा। स्थानीय लोगों के लिए बाजार, रोजगार, शिक्षा और अन्य जरूरी कामों से जुड़े क्षेत्रों तक पहुंचना भी आसान होने की उम्मीद है।
पुल के दोनों सिरे जुड़ने के बाद क्षेत्र के लोगों में निर्माण कार्य जल्द पूरा होने की उम्मीद बढ़ी है। अब पुल के बाकी हिस्सों से जुड़े निर्माण और आवश्यक कार्य पूरे किए जा रहे हैं, ताकि इसे यातायात के लिए खोला जा सके।
14 साल तक चली कानूनी लड़ाई, फिर निर्माण ने पकड़ी रफ्तार
हरनोड़ा पुल की कहानी केवल निर्माण परियोजना की नहीं, बल्कि करीब 14 साल की कानूनी लड़ाई से भी जुड़ी है। स्थानीय निवासी देशराज ने पुल निर्माण के लिए लंबे समय तक प्रयास किए। उनके अनुसार, वर्ष 2012 में बीबीएमबी के साथ कानूनी लड़ाई शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
इस कानूनी प्रक्रिया के बाद वर्ष 2016 में बीबीएमबी ने पुल निर्माण के लिए 18 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया। इसके अगले वर्ष यानी 2017 में चंडीगढ़ की एक कंपनी को पुल के निर्माण का काम सौंपा गया।
हालांकि, निर्माण की गति उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। वर्ष 2023 तक पुल का महज 20 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया था। लंबे समय तक धीमी गति से चल रहे निर्माण के कारण स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिलने में लगातार देरी होती रही।
2024 के बाद निर्माण में आई तेजी
वर्ष 2024 में लोक निर्माण विभाग ने निर्माण कार्य में तेजी लाई। इसके बाद परियोजना ने गति पकड़ी और अब पुल के दोनों सिरे आपस में जुड़ चुके हैं।
नौ सितंबर को पुल के दोनों सिरे जुड़ने के बाद परियोजना एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। अब शेष निर्माण कार्य को पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि लंबे इंतजार के बाद पुल जल्द ही तैयार होकर यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता सुंदरनगर रोशन ठाकुर ने बताया कि पुल के दोनों सिरे नौ सितंबर को जुड़ चुके हैं। विभाग का लक्ष्य नवंबर तक पुल का लोकार्पण करवाने का है। शेष निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा।
रामपुर और किन्नौर जाने वालों को मिलेगा वैकल्पिक रास्ता
हरनोड़ा पुल की अहमियत केवल स्थानीय कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। इसके बनने से मंडी, बिलासपुर और तत्तापानी के रास्ते ऊपरी हिमाचल तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
रामपुर और किन्नौर की तरफ जाने वाले यात्रियों के लिए यह मार्ग एक उपयोगी वैकल्पिक रास्ता बन सकता है। वर्तमान में इन क्षेत्रों की ओर जाने वाले लोगों को कई बार शिमला-सोलन होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। हरनोड़ा पुल और उससे जुड़ी सड़क व्यवस्था के विकसित होने के बाद सफर अपेक्षाकृत सुगम होने की उम्मीद है।
इससे न केवल यात्रा का समय और दूरी कम होने की संभावना है, बल्कि मंडी-बिलासपुर क्षेत्र के बीच परिवहन संपर्क भी मजबूत होगा।
पर्यटन के साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण परियोजना
हरनोड़ा पुल को पर्यटन और सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तत्तापानी क्षेत्र पहले से ही पर्यटन की दृष्टि से अहम है। मंडी और बिलासपुर से इसकी बेहतर कनेक्टिविटी होने पर क्षेत्र में पर्यटकों और स्थानीय यात्रियों की आवाजाही बढ़ने की संभावना है।
इसके अलावा यह मार्ग ऊपरी हिमाचल के क्षेत्रों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रामपुर और किन्नौर की ओर जाने के लिए वैकल्पिक संपर्क उपलब्ध होने से क्षेत्रीय सड़क नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। मंडी से बिलासपुर होते हुए ऊपरी हिमाचल और चीन सीमा की दिशा में पहुंच को सुगम बनाने के लिहाज से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
लंबे इंतजार के बाद अब उद्घाटन का इंतजार
करीब 18 करोड़ रुपये की लागत और 156 मीटर लंबाई वाला हरनोड़ा पुल अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जिसका स्थानीय लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। वर्ष 2012 में शुरू हुई कानूनी लड़ाई, 2016 में बजट प्रावधान, 2017 में निर्माण एजेंसी को काम सौंपे जाने और 2023 तक केवल 20 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद 2024 में निर्माण ने तेजी पकड़ी।
अब दोनों सिरे जुड़ चुके हैं और विभाग ने नवंबर तक पुल को जनता के लिए खोलने का लक्ष्य रखा है। यदि शेष काम निर्धारित समय के अनुसार पूरा होता है तो मंडी, बिलासपुर, तत्तापानी और ऊपरी हिमाचल के बीच सड़क संपर्क को एक बड़ी सुविधा मिल सकती है। साथ ही सुंदरनगर क्षेत्र के कई गांवों के लोगों के लिए भी यह पुल रोजमर्रा की आवाजाही को काफी आसान बनाने वाला साबित हो सकता है।



